Sunday, September 20, 2026
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Delhi Air Pollution: दिल्ली के ज़हरीले प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुराने वाहनों पर गिरी गाज

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Delhi Air Pollution: दिल्ली–एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा है कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल तात्कालिक और आपात उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके लिए व्यावहारिक, कारगर और दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी होगी। अदालत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को निर्देश दिया है कि वह अपनी दीर्घकालिक योजनाओं की समीक्षा कर उन्हें और मजबूत करे, ताकि अगले वर्ष दिल्ली को फिर से ऐसी गंभीर स्थिति का सामना न करना पड़े।

Delhi Air Pollution: हर 15 दिन में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगले वर्ष की तैयारी अभी से शुरू की जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से अदालत ने आदेश दिया है कि इस मामले में हर 15 दिन पर नियमित सुनवाई की जाएगी। अदालत का मानना है कि लगातार निगरानी और समीक्षा से ही प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा सकता है।

Delhi Air Pollution:पुराने वाहनों पर सख्ती

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुराने वाहनों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने 12 अगस्त के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि अब BS-3 और उससे नीचे स्तर के पुराने वाहनों को मिली छूट समाप्त कर दी गई है। अब केवल BS-4 और उससे ऊपर स्तर के वाहन ही कार्रवाई से छूट के दायरे में आएंगे। इसके तहत डीजल के 10 साल पुराने और पेट्रोल के 15 साल पुराने BS-4 या उससे ऊपर के वाहन ही फिलहाल सड़कों पर चल सकेंगे। BS-3 और उससे नीचे के पुराने वाहनों पर अब दंडात्मक कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

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Delhi Air Pollution:टोल बूथ और ट्रैफिक जाम पर चिंता

कोर्ट ने दिल्ली की सीमाओं पर स्थित एमसीडी के नौ टोल बूथों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि इन टोल बूथों पर लगने वाला लंबा ट्रैफिक जाम प्रदूषण को और बढ़ाता है। सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआई और एमसीडी को निर्देश दिया है कि वे इन टोल बूथों को अस्थायी या स्थायी रूप से स्थानांतरित करने की संभावना पर विचार करें और इस संबंध में जल्द निर्णय लें।

Delhi Air Pollution:निर्माण मजदूरों के लिए राहत

प्रदूषण के कारण निर्माण गतिविधियां बंद होने से प्रभावित मजदूरों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि बेरोजगार हुए निर्माण मजदूरों को सीधे उनके बैंक खातों में मुआवजा दिया जाए और इस प्रक्रिया में किसी भी तरह के शोषण से बचा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने सुझाव दिया कि हर साल प्रदूषण के मौसम में निर्माण कार्य बंद होने की स्थिति को देखते हुए मजदूरों के लिए तीन महीने के वैकल्पिक रोजगार की नीति पर भी विचार किया जाए।

स्कूल बंद रखने के फैसले में दखल नहीं

नर्सरी से कक्षा पांच तक के स्कूल बंद रखने के दिल्ली सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय अस्थायी रूप से बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया है और जल्द ही वैसे भी शीतकालीन अवकाश शुरू होने वाला है, इसलिए इसमें दखल देने की आवश्यकता नहीं है।

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Delhi Air Pollution:दीर्घकालिक समाधान पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण की समस्या का समाधान टुकड़ों में किए गए उपायों से संभव नहीं है। कोर्ट ने CAQM से कहा कि वह शहरी यातायात प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन, औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण और किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहन जैसी दीर्घकालिक रणनीतियों पर गंभीरता से काम करे। साथ ही लोगों में जागरूकता फैलाने की भी आवश्यकता पर जोर दिया गया।

अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हर साल दिल्ली को इसी तरह के प्रदूषण संकट का सामना करना पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई जनवरी में की जाएगी, जहां अब तक उठाए गए कदमों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

Delhi Air Pollution

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