Tuesday, January 20, 2026
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High Court का अहम फैसला: JBT भर्ती के लिए B.L.Ed. और D.El.Ed. दोनों योग्यताएं मान्य

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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में JBT (Junior Basic Training) भर्ती को लेकर चल रहे विवाद पर स्पष्टता प्रदान की है। अदालत ने यह तय किया कि B.L.Ed. (बैचलर ऑफ एलिमेंट्री एजुकेशन) और D.El.Ed. (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) — दोनों ही योग्यताएं शिक्षक पदों के लिए वैध मानी जाएंगी। यह निर्णय उस समय आया जब चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के आदेश को चुनौती दी थी।


क्या था मामला?

JBT शिक्षक भर्ती में केवल D.El.Ed. को मान्यता देने पर कई उम्मीदवारों ने आपत्ति जताई थी। B.L.Ed. धारक उम्मीदवारों का दावा था कि उनकी डिग्री भी प्राथमिक शिक्षा के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। CAT ने इस पर सहमति जताते हुए दोनों डिग्रियों को मान्य ठहराया, जिसे चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।


हाईकोर्ट की टिप्पणी: “योग्यता का भेदभाव नहीं हो सकता”

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने साफ कहा कि B.L.Ed. चार वर्षीय डिग्री को नकारना शैक्षणिक समानता के सिद्धांत के विपरीत है। उन्होंने कहा, “जब दोनों पाठ्यक्रमों का उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा में दक्षता प्रदान करना है, तो किसी एक को वरीयता देना अन्यायपूर्ण होगा।” अदालत ने कहा कि शैक्षणिक अर्हताओं में लचीलापन और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।


चंडीगढ़ प्रशासन की दलीलें खारिज

प्रशासन की ओर से कहा गया था कि D.El.Ed. को NCTE (राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) की विशेष मान्यता प्राप्त है और इसलिए वही उपयुक्त डिग्री है। लेकिन हाईकोर्ट ने जवाब में कहा कि NCTE ने भी अपने विभिन्न निर्देशों में B.L.Ed. को प्राथमिक शिक्षा के लिए वैध माना है।


उम्मीदवारों को राहत, चयन प्रक्रिया फिर से खुलेगी?

इस निर्णय से सैकड़ों B.L.Ed. धारक अभ्यर्थियों को राहत मिली है जो भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए थे। अब संभावना है कि प्रशासन को चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी या उन अभ्यर्थियों को शामिल करना होगा जिन्हें पहले अयोग्य माना गया था।


क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?

  • शिक्षा में समानता का सिद्धांत मजबूत हुआ
  • भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई
  • अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के मामलों में यह दृष्टांत बन सकता है

आगे की राह

चंडीगढ़ प्रशासन अभी यह तय करेगा कि वह इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा या नहीं। हालांकि, इस आदेश के बाद राज्य प्रशासन की नीति में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।


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© यह लेख मौलिक है और किसी भी स्रोत से नकल नहीं की गई है। यह पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।


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