प्रत्येक सीनियर एडवोकेट अपने दफ्तर में रखें कम से कम 15 जूनियर, सुप्रीम कोर्ट ने जताई मंशा

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दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ ने 20 साल का अनुभव रखने वाले प्रत्येक सीनियर एडवोकेट को कम से कम 15 जूनियर एडवोकेट का मार्गदर्शन करने को कहा है।

जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बीवी नागरत्ना की अवकाश पीठ ने सीनियर एडवोकेट्स से जूनियर एडवोकेट्स को अदालती तौर तरीके और कला पर मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक ऐसा करने से 15 में से कम से कम 5 अच्छे स्तर के एडवोकेट निकल कर सामने आएँगे और दूसरी पंक्ति के एडवोकेट तैयार करने में सहायता मिलेगी।

इससे पहले जस्टिस रस्तोगी ने जूनियर्स को छुट्टी के दौरान अधिक अवसर दिए जाने की अपील की थी। हाल में ही सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने छुट्टियों के दौरान सीनियर एडवोकेट की उपस्थिति के संबंध में एक समान नियम बनाने के लिए पीठ से अनुरोध किया था। जिसपर जस्टिस अजय रस्तोगी ने कहा, “हम चाहते हैं कि इस पेशे की युवा पीढ़ी को तैयार किया जाए ताकि जब पुरानी पीढ़ी छोड़ना चाहे तो युवा पीढ़ी की एक पौध तैयार रहे।

कोर्ट में मौजूद सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, “हम सभी इसके लाभार्थी रहे हैं। जब मैं वकालत में आयी थी तो केवल जूनियर ही मामलों को कोर्ट के सामने मेंशन कर सकते थे।” अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने पीठ से अपील की कि अगर बहस के दौरान जूनिर्यर्स को कठिनाई होती है तो पीठ इसे खारिज करने की बजाए उन्हें छुट्टी के बाद या अगली तारीख पर वापस आने का अवसर दे।

जस्टिस बीवी नागरत्ना ने बार काउंसिल से जूनियर्स के लिए एक सीरीज़ आयोजित करने को कहा, जिससे वह सीनियर एडवोकेट के अनुभवों से अदालती तौर-तरीके सीख सकें। 

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