एनकाउंटर कॉप से विधायक तक का सफर तय करने वाले राजेश्वर सिंह ने शुरू की वकालत, वकील की पोशाक में सुप्रीम कोर्ट से तस्वीर आयी सामने

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कुछ इंसानों की विशेषता होती है वो किसी एक मुक़ाम से संतुष्ट नहीं होते, वो हमेशा एक नई मंज़िल की तलाश में निकल पड़ते हैं। यही विशेषता उत्तर प्रदेश विधानसभा की सरोजनी नगर सीट से विधायक राजेश्वर सिंह की है। ईडी के पूर्व संयुक्त निदेशक ने राजनीति के बाद अब वकालत की राह पकड़ ली है।

ट्विटर पर उनकी बहन आभा सिंह की अकाउंट से पोस्ट की गई तस्वीर में राजेश्वर सिंह वकील की वेशभूषा में सुप्रीम के सामने पोज देते नज़र आ रहे हैं। शुक्रवार को वह चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना की कोर्ट में एक मेडिकल कालेज के ख़िलाफ़ बतौर एडवोकेट छात्रों के समूह का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

ईडी अधिकारी के तौर पर हमेशा हाई प्रोफ़ाइल मामलों को लेकर सुर्खियों में रहे राजेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले वीआरएस लेने की घोषणा की। यूपी विधानसभा चुनाव में हॉट सीट रही सरोजनी नगर से भाजपा के टिकट पर उन्होंने अखिलेश यादव के करीबी पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा को 56 हज़ार वोटों से पराजित किया। 

एनकाउंटर कॉप के नाम से मशहूर राजेश्वर सिंह ने 1996 में डिप्टी एसपी के रूप में यूपी पुलिस को जॉइन किया। अपने सर्विस के शुरुआती 13 महीनों में ही राजेश्वर सिंह ने 13 एनकाउंटर किए। यूपी पुलिस के लिए 11 साल की सर्विस के दौरान उन्होंने दर्जनों एनकाउंटर किए। 2007 में प्रति नियुक्ति पर उन्हें ईडी में तैनाती मिली।

ईडी अधिकारी से विधायक बनने के सफ़र के दौरान उन्होंने बहुत सारे हाईप्रोफ़ाइल मामले हैंडल किए। कॉमनवेल्थ गेम्स, अगस्ता वेस्टलैंड और कोल स्कैम में उनकी भूमिका रही। उनके नेतृत्व में 2जी स्पैक्ट्रम, और एयरसेल-मैक्सिस जैसे बड़े मामलों की भी जाँच हुई। 

उनका ट्रैक रिकार्ड देखने पर पता चलता है कि वह बड़े नेताओं की जाँच के मामले में विशेषज्ञ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, जगनमोहन रेड्डी और मधु कोड़ा से जुड़े मामलों की जाँच इनके ज़िम्मे रही। हालिया मामलों में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदम्बरम और उनके बेटे कीर्ति चिदम्बरम के ख़िलाफ़ ईडी द्वारा की गई कार्रवाई भी इनकी अगुआई में हुई। हालाँकि इस कार्रवाई को लेकर पी चिदम्बरम ने ईडी पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था।

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर ज़िले के मूल निवासी राजेश्वर सिंह के पिता भी पुलिस अधिकारी थे। आईएसएम धनबाद से इंजीनियरिंग व ह्यूमन राइट्स में भी डिग्री प्राप्त करने वाले राजेश्वर सिंह ने ईडी में अपनी सर्विस के दौरान 2018 में वकालत की डिग्री हासिल की। जिसका इस्तेमाल अब वह राजनीति से इतर कर रहे हैं।

राजनीति और वकालत का संगम बहुत पुराना है। विधायक राजेश्वर सिंह ऐसा करने वाले पहले नेता नहीं हैं। राजनीति और वकालत में एक साथ हाथ आज़माने वाले बहुत से नाम हैं, बहुत से नाम ऐसे हैं जिन्होंने ने दोनों ही क्षेत्रों में सर्वोच्च मुक़ाम हासिल किया है। अगर पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों की सूची को ध्यान से देखें तो स्व अरुण जेटली, पी चिदम्बरम, रवि शंकर प्रसाद, कपिल सिब्बल, सलमान ख़ुर्शीद, अभिषेक मनु सिंघवी कुछ ऐसे बड़े नाम हैं जिन्होंने राजनीति के साथ वकालत में भी अपनी धाक जमाई है। ये सभी पूर्व केन्द्रीय मंत्री के साथ सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील भी रहे। उत्तर प्रदेश की राजनीति के शिखर पर रहे सतीश चन्द्र मिश्रा भी सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट हैं।

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